*लगातार बारिश से दुर्गूकोदल क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ी*
*कटाई के कगार पर धान की फसल पर मंडरा रहा नुकसान का खतरा, इस बार बारिश ने बनाया रिकॉर्ड*
दुर्गूकोदल।विकासखंड दुर्गूकोदल में इन दिनों लगातार हो रही बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम में अचानक हो रहे। बदलाव और अत्यधिक वर्षा के कारण धान की खड़ी फसल पर संकट मंडराने लगा है। क्षेत्र के अधिकांश किसानों ने इस साल हारुण किस्म के धान की बोआई की थी, जो अब कटाई के लिए तैयार हो रही थी, लेकिन बारिश के कारण फसल को नुकसान का खतरा बढ़ गया है।इस बार दुर्गूकोदल तहसील में अब तक 1717 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड माना जा रहा है। लगातार हो रही वर्षा से खेतों में पानी भर गया है और धान की फसल झुकने लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी अधिक देर तक खेतों में भरा रहने से फसल सड़ सकती है, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है।किसानों का कहना है कि इस समय मौसम खुलने की जरूरत है ताकि धान की कटाई का कार्य शुरू हो सके। यदि बारिश का सिलसिला यूं ही जारी रहा तो खेतों में खड़ी फसल का भारी नुकसान होगा और किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा।
कई गांव के किसान परेशान
लगातार बारिश से दमकसा, सिवनी, लोहतर, तरहुल, हाटकोदल सहित कई गांवों के किसान खासे चिंतित हैं। हारुण किस्म के धान पर बारिश का सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है, क्योंकि यह किस्म पानी और नमी के प्रति बेहद संवेदनशील होती है।स्थानीय किसानों ने बताया कि अभी फसल की कटाई में देरी से दाने काले पड़ सकते हैं और धान की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। इससे मंडी में कीमत कम मिलने का खतरा है।विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक वर्षा के चलते अवला (धान की बालियां झुकना और सड़ना) जैसी समस्या भी दिख रही है। यदि आने वाले दिनों में मौसम साफ नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ सकता है।
क्षेत्र के किसान प्रशासन और कृषि विभाग से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। किसानों का कहना है कि यदि बारिश से फसल खराब होती है तो मुआवजा और बीमा क्लेम की व्यवस्था तत्काल की जानी चाहिए।लगातार बारिश ने जहां किसानों की उम्मीदों को धूमिल किया है, वहीं इस बार की रिकॉर्ड वर्षा ने उनके माथे पर चिंता की गहरी लकीरें खींच दी हैं।

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