*सिंदूर खेला की रस्म के साथ दी गई मां दुर्गा को विदाई, महिलाओं ने मांगा सौभाग्य का आशीर्वाद*
दुर्गूकोदल।नवजोत मां दुर्गा उत्सव समिति, दुर्गूकोदल द्वारा आयोजित 30वें वर्षगांठ के अवसर पर नवरात्रि पर्व का भव्य आयोजन बड़े ही हर्षोल्लास और धार्मिक श्रद्धा के साथ सम्पन्न हुआ। नौ दिनों तक चले इस आयोजन में ग्रामवासी, व्यापारी संघ, अधिकारी कर्मचारी,महिला ग्रुप और लेडीज़ ग्रुप ने संयुक्त रूप से सहभागिता निभाई।नवरात्रि पर्व के दौरान प्रतिदिन विविध धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें रामधुनी, जसगीत, गरबा नृत्य, मानस गान, रामायण पाठ और अन्य भक्ति कार्यक्रम शामिल रहे। गांव की महिलाएं, युवा और बुजुर्ग सभी उत्साहपूर्वक कार्यक्रमों में सम्मिलित हुए और मां दुर्गा की महिमा का गुणगान किया।सिंदूर खेला की परंपरा का निर्वहन नवरात्रि के दसवें दिन मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन से पूर्व दुर्गा मंच पर महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाई। इस अवसर पर विवाहित महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर उनके चरणों में आशीर्वाद मांगा। मान्यता है कि यह परंपरा विवाहित महिलाओं के सौभाग्य और उनके पति की दीर्घायु के लिए शुभ मानी जाती है। इसी वजह से सिंदूर खेला नवरात्रि के सबसे खास आयोजनों में से एक बन गया है।महिलाओं ने एक-दूसरे को भी सिंदूर लगाकर जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और शांति की कामना की। मां दुर्गा की विदाई का यह क्षण भावुकता और आस्था से भरा रहा, जहां श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं लेकिन दिल में विश्वास था कि मां अगले वर्ष पुनः विराजेंगी।कार्यक्रम में रही विशेष उपस्थिति दुर्गा उत्सव के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं और ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सरपंच शकुंतला नरेटी, उप सरपंच तामेश्वरी जैन, लेडीज़ ग्रुप की अध्यक्ष नीलम साहू, बागोमारानी विश्वास, सविता सेन, नंदिनी दीवान, हिरेश्वरी कोराम, उत्तर वारे समेत बड़ी संख्या में महिलाएं सम्मिलित हुईं।समिति सदस्यों ने बताया कि पिछले 30 वर्षों से निरंतर सार्वजनिक दुर्गा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है, और यह अब ग्रामवासियों की धार्मिक आस्था और एकता का प्रतीक बन चुका है।कार्यक्रम का समापन मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन के साथ हुआ। ग्रामवासियों ने श्रद्धा के साथ विदाई दी और अगले वर्ष पुनः मां दुर्गा के स्वागत का संकल्प लिया।

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