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Gariyaband: आखिर ईंट के अवैध निर्माण के मामले पर प्रशासन की चुप्पी क्यों?*

*आखिर ईंट के अवैध निर्माण के मामले पर प्रशासन की चुप्पी क्यों?*


रिपोर्ट --जयविलास शर्मा 


*पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के रोक के बावजूद क्षेत्र में सथानीय प्रशासन के संरक्षण में चल रहा अवैध कारोबार



गरियाबंद --गत वर्षों की अपेक्षा इस वर्ष ईंट के अवैध निर्माण का कारोबार जोरों से चल रहा है। भट्टी वाले ईंट निर्माण पर केन्द्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के रोक के बावजूद भी स्थानीय प्रशासन कारवाई के मुड में नहीं है।वन राजस्व और खनिज विभाग के अधिकारीयों के संरक्षण में पर्यावरण जलवायु और राजस्व की क्षति पहुंचा रहे कारोबारीयों में कारवाई का खौफ नहीं है वहीं सरकार को लाखों के राजस्व का चुना लगा रहे हैं। जहां सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिये पेड़ लगाने की बात करती वहां प्रशासन के नाक के तले सैकड़ों पेड काटे जा रहे हैं और मामले प्रशासन चुप्पी बता रही हैं अवैध कारोबारी प्रशासन पर भारी है या अवैध कारोबारीयों और प्रशासन के बीच सेटिंग का खेल चल रहा है। 


*आधे दर्जन कारोबारी बेखौफ फैक्ट्री चला रहे हैं*


कच्चे ईंट निर्माण को लेकर देश में केवल कुम्हार प्रजाति को ही नियमों के आधार पर छुट होता है पर क्षेत्र में ऐसे 200 से अधिक गांव है जहां अवैध ईंट का निर्माण हो रहा है खास बात ये है ईंट के अवैध‌ कारोबार में संलिप्त लोग ना इस प्रजाति में आते हैं और ना ही इनके पास निर्माणा को लेकर कोई वैध दस्तावेज है। क्षेत्र भर में अवैध ईंट निर्माण कारोबारी गिरसूल‌ नाला, कदलीमुडा, डोंगरी गुडा,करलागुडा आधे दर्जन गांवों में कच्चे भट्टे की फैक्ट्री चला रहे हैं फिर  भी स्थानीय प्रशासन अवैध कारोबार पर ठोस कारवाई नहीं कर रही है।


*8 से 10 हजार ट्रीप में बिकता है ईंट चार गुना मुनाफे का कारोबार*


ईंट निर्माण को लेकर कारोबारी आखिर क्यों इतना रूचि लेते हैं जब इस बात की पड़ताल की गयी तो प्रति हजार कच्चे ईंट के निर्माण से लेकर उसे लकड़ी से पकाने में मात्र 2200 रूपये का खर्च होता है और उसे ट्रेक्टर की एक ट्रीप यानी प्रति दो हजार ईंट को कारोबारी 8 से 10 हजार में बेचता है। इस प्रकार ईंट निर्माण का अवैध कारोबार चार गुना मुनाफे का काम है। इसलिये कारोबारी प्रशासन के सभी नियमों को ताक में रख कर प्रशासन कर सेटिंग कर कारोबार में रूचि दिखा रहे हैं।


*चिमनी भट्टे का जिले में एक भी सरकारी मंजूरी नहीं, मजदूर का भी पंजीयन कराया नहीं*


ईंट निर्माण के लिये चिमनी भट्टी की मंजूरी दिया जाता है पर गरियाबंद जिले भर में कहीं भी इस भट्टे के लिये किसी ने मंजुरी लिया नही है और लकडी से पकायें जाने का भी किसी ने अनुमति लिया नही है ऐसे में राजस्व वन खनिज पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को इसमें कारवाई करनी  चाहिये पर किसी विभाग ने अब तक कोई कार्यवाही नहीं की है।


*खनिज और वन विभाग की कारवाई शून्य राजस्व की वसूली भी नहीं के बराबर*


ब्लाक मे खनिज कार्यालय नहीं होने से खनिज विभाग का कामकाज राजस्व को सम्हालना पड रहा है खनिज विभाग जिला मुख्यालय में होने से अब तक अवैध  ईंट निर्माण को लेकर कोई कारवाई नहीं की है वहीं वन विभाग पेड़ कटाई पर ध्यान नहीं दे रहा है ऐसे में पर्यावरण संरक्षण एवं कच्चे भट्टे को लकडी से पकाये जाने से पर्यावरण खतरे में पड़ गया है और सरकार को राजस्व की भारी क्षति हो रही है।

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