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Durgkondal: साय केबिनेट बैठक में धान खरीदी निर्णय नहीं, छत्तीसगढ़ के किसान मायूस*

*साय केबिनेट बैठक में धान खरीदी निर्णय नहीं, छत्तीसगढ़ के किसान मायूस*




 दुर्गूकोंदल ।छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और बोनस मुद्दा सरकार  बनाती है और सरकार को कुर्सी से भी नीचे उतार देती है। 2018के विधानसभा चुनाव में कर्जमाफी और 25सौ रूपए धान की समर्थन मूल्य ने छत्तीसगढ़ में भाजपा की सफाया कर कांग्रेस को कुर्सी पर बैठा दिया। और 5साल सरकार चली। लेकिन 2023के चुनाव में 21क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी, 31सौ रूपये समर्थन मूल्य और भाजपा कार्यकाल की दो वर्ष की बोनस, महिलाओं को प्रति वर्ष 12हजार रूपए की घोषणा ने 5वर्ष में ही कांग्रेस सरकार को कुर्सी से उतार दिया।  लेकिन प्रदेश में भाजपा के एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री की कैबिनेट बैठक में धान खरीदी की निर्णय नहीं होने से छत्तीसगढ़ के किसान मायूस हैं। धान खरीदी चुनावी घोषणा पत्र के अनुसार नहीं होने चिंतित हैं। इन दिनों पूर्व आदेश के तहत मोटा धान 2183 और पतला धान 2203 रूपए क्विंटल की दर पर प्रति एकड़ 20 क्विंटल खरीदा जा रहा है। यह राशि दो-तीन दिन में कर्ज काटकर किसानों के खाते में पहुंच भी रही है। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार शेष अंतर की राशि बोनस समेत राजीव गांधी न्याय योजना के तहत प्रति क्विंटल करीब नौ हजार रूपए किसानों को चार किश्तों में देती रही है। इधर भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में दो साल का बकाया बोनस 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी के जन्म दिन पर देने का वायदा

कैबिनेट के प्रथम बैठक में धान खरीदी की लिमिट 20 क्विंटल से बढ़कर 21 क्विंटल

किसानों में निराशा भी

छत्तीसगढ़ के किसानों में निराशा छा गई। अंचल के किसान रामसिंह, मंगल, सत्यनारायण, भारत ने  कहा कि धान खरीदी प्रति एकड़ 21 क्विंटल और 31 सौ रूपए प्रति क्विंटल दर से खरीदी  करने का वादा भाजपा ने चुनाव में घोषणा किया था। लेकिन किसान असमंजस में हैं कि यह

रेट मिलेगा या नहीं, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कैबिनेट ने केवल दो साल के बकाया बोनस को लेकर फैसला किया है।

तथा 3100 रुपए एक मुश्त भुगतान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे जो मोदी को गारंटी में

शामिल है, पर निर्णय नहीं लिया  लेकिन नए रेट पर धान खरीदी को लेकर अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। वर्तमान में  2183 रूपये और 2203 रूपए प्रति क्विंटल का पुराना रेट मिल रही है, ऊपर से कर्ज की राशि भी तुरंत काटी जा रही। भाजपा ने किसानों की भरोसा को पहली कैबिनेट बैठक में तोड़ दिया है। चुनाव में भाजपा के कार्यकर्ता 2लाख तक की कर्ज माफी की वादा भी मौखिक रूप से किये थे। लेकिन कोई भी घोषणा अमल भाजपा सरकार नहीं कर रही है। सिर्फ दो वर्ष की बोनस देने का प्रस्ताव ही पास किया है। किसानों का कहना है, धान खरीदी घोषणा पत्र के अनुसार होना चाहिए।

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