*गरियाबंद में स्वास्थ्य सिस्टम फैल पिछड़ी जनजाति महिला को नहीं मिला जजकी सुविधा*
रिपोर्टर --जयविलास शर्मा
*प्रसव शुल्क के अभाव में पांच दिनों तक ओडिशा के निजी क्लीनिक में रही बंधक
गरियाबंद --गरियाबंद में एक फिर स्वास्थ्य सिस्टम की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। आदिवासी विकास खण्ड मैनपुर के मुचबहाल की रहने वाली पिछड़ी जनजाति की 23 वर्षीय महिला नवीना चिंदा को अपने दूसरी प्रसव में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है एक तरफ सरकार महिला के प्रसव को लेकर जितना गंभीरता प्रदर्शित करती है उससे ज्यादा गरियाबंद के स्वास्थ्य विभाग के घोर लापरवाही और स्वास्थ्य सुविधा मुहैया ना कराने से पिडित महिला को छग के बजाय ओडिशा धर्मगढ़ के एक निजि नर्सिंग होम में मंहगे फीस पर प्रसव कराने मजबूर होना पड़ा पर मुचबहाल की पिछड़ी जनजाति की गरीब महिला के पास मोटी फीस अदायगी करने पैसा नहीं था जिसके चलते उसे ओडिशा के जय मां भण्डार घरयेन निजी नर्सिंग होम में पांच दिनों तक बंधक रहना पड़ा।
*उधर पति आंध्रप्रदेश में बंधक प्रसव के वक्त नहीं था पत्नि के साथ*
मैनपुर के मुचबहाल की पिछड़ी जनजाति की गर्भवती महिला नवीना का पति संजू चिंदा परिवार का भरण पोषण करने आंध्र प्रदेश में बंधक है तो इधर पत्नि नवीना के प्रसव के दरम्यान भी उसके पास नहीं था।अपनी सास यशोदा चिंता के साथ दो वर्षीय बेटे के साथ जैसे तैसे ओडिशा के नर्सिंग होम 18 जनवरी को पहुंची इसी दिन निजी नर्सिंग होम में 5 हजार जमाकर भर्ती भी हो गयी पर प्रसव भी हो गया नवीना ने इसी दिन एक कन्या को जन्म भी दिया प्रसव 20 हजार में तय हुआ था मैंने को बकाया राशि भी उनके पास नहीं इसलिये डिस्चार्ज नहीं हो सका सास यशोदा चिंदा बहू नवीना और उसके नवजात शिशु और दो वर्षीय बेटे को निजी नर्सिंग होम में छोड़ कर पैसे की जुगाड में गांव वापस आ गयी पर पांच दिनों तक मोटी फीस की राशि जुगाड करती रही पर जुगाड नहीं हो सका।
*खबर लगते ही जिपं अध्यक्ष ने बढ़ाया मदद का हाथ 5 हजार अदायगी के बाद महिला पहुंची गांव*
निजि नर्सिंग होम में पैसे के अभाव से दिक्कतों को झेल रही पिछड़ी जनजाति की नवीना के बारे मिडिया कर्मियों के जरिए जैसे ही गरियाबंद ज़िपं अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप को इसकी खबर लगी तो गौरीशंकर ने हास्पिटल प्रबंधन से बात कर वहां की बकाया फीस भरने की पहल की और एंबुलेंस भेजवा कर पिडित महिला को गृहग्राम मुचबहाल पहुंचाया, मामला हाईप्रोफाइल होता देख निजि नर्सिंग होम के प्रबंधन ने 5 हजार लेकर डिस्चार्ज कर दिया इस तरह जिपं अध्यक्ष और मिडिया कर्मियों के पहल से पिछड़ी जनजाति महिला को पांच दिनों बाद वहां से निकाल लिया गया।निजी नर्सिंग होम से वापस लाने के इस पूरे मुहिम में मिडिया कर्मियों की अहम भूमिका रही है।
*कहां गयी स्वच्छ प्रसव के स्वास्थ्य,और महिला बाल विकास विभाग की मानिटरिंग?*
सरकार और सरकार के प्रशासन महिला के प्रसव को लेकर कई दावें कई अभियान चलाने की बात करती है पर पिछड़ी जनजाति महिला के मंहगी प्रसव को लेकर अब सवाल उठता गर्भवती महिला नवीना के गर्भ ठहरने से लेकर जजकी (प्रसव) तक महिला बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की मानिटरिंग कहां गुम हो गयी।जब तक प्रसव नहीं हो जाता रिपोर्ट आनलाईन दर्ज की जाती है पर नवीना के साथ हुये लापरवाही ने प्रशासन के पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है।
*हमने उसे चले जाने को कहा था राशि देने में असक्षम थी तो कोई बात नहीं बताती तो उन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाता।*--- डॉ.चैतन्य मेहेर
मां भण्डारघरणी निजी नर्सिंग होम धर्मगढ़
*मैं मिटिंग में हूं मुझे इसकी जानकारी नहीं है फिर भी दिखवाता हूं ऐसी स्थिति क्यों निर्मित हुयी*।--
गजेन्द्र ध्रुव खण्ड चिकित्सा अधिकारी मैनपुर


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