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*BELGAHANA आदर्श होली की मिसाल: लुफा के लहंगाभाठा में मंत्रोच्चार के साथ हुआ होलिका दहन, व्यसन मुक्त व हर्बल होली का लिया संकल्प*

 



लुफा (लहंगाभाठा)। रंगों के पर्व होली से पहले ग्राम पंचायत लुफा के लहंगाभाठा में ऐसी मिसाल पेश की गई, जिसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। यहां महिलाओं, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने एक साथ एकत्र होकर मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धा और भक्ति भाव से होलिका दहन किया।


गांव के वरिष्ठ बुजुर्गों ने विधि-विधान से अग्नि प्रज्ज्वलित कर होलिका दहन की शुरुआत की। इसके बाद उपस्थित ग्रामवासियों ने होलिका की परिक्रमा करते हुए अक्षत अर्पित किया और परिवार व गांव की सुख-समृद्धि की कामना की। पूरा वातावरण वैदिक मंत्रों और जयघोष से गूंज उठा।


इस बार की होली को खास बनाने की पहल गायत्री परिवार के राजाराम साहू ने की। उनके आह्वान पर ग्रामवासियों ने “व्यसन मुक्त और आदर्श होली” मनाने का संकल्प लिया। सभी ने एक स्वर में शराब मुक्त, हुड़दंग मुक्त और सौहार्दपूर्ण होली मनाने का वचन दिया। साथ ही होली के दौरान चोरी जैसी कुरीतियों पर रोक लगाने का भी सामूहिक आह्वान किया गया।


कार्यक्रम के दौरान ग्रामवासियों को पर्यावरण संरक्षण का विशेष संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि होलिका दहन के लिए हरे-भरे पेड़ों की कटाई न की जाए, बल्कि सूखी लकड़ियों और प्राकृतिक रूप से गिरे हुए उपलों का ही उपयोग किया जाए। गांव में वृक्षों की व्यर्थ कटाई पर रोक लगाने और अधिक से अधिक पौधारोपण करने का सामूहिक संकल्प भी लिया गया। यह भी तय किया गया कि भविष्य में किसी भी धार्मिक या सामाजिक आयोजन में पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचा जाएगा।


हर्बल होली की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि प्राकृतिक रंग फूलों, हल्दी, चंदन, नीम और अन्य वनस्पतियों से तैयार किए जाते हैं, जो त्वचा और आंखों के लिए सुरक्षित होते हैं तथा पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करते। साथ ही जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सूखी होली खेलने और पानी की अनावश्यक बर्बादी रोकने का भी संदेश दिया गया।


कार्यक्रम के अंत में ग्राम सरपंच एवं सहयोगियों द्वारा प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई। गांव के लोगों ने इसे केवल पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और एकता का प्रतीक बताया।


लहंगाभाठा की यह पहल न केवल होली के उत्साह को बढ़ाती है, बल्कि समाज को एक सकारात्मक संदेश भी देती है कि परंपरा, संस्कार और प्रकृति के सम्मान के साथ मनाया गया त्योहार ही सच्ची ‘आदर्श होली’ कहलाता है।

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