*समितियों में खरीदे गये धान का ना टीओ कट रहा और ना ही डीओ*
*आखिर कब तक उठाव के लिये बचे धान का रखवाली करेगी समितियां?
गरियाबंद --छग सरकार किसानों से धान तो खरीद ली मगर उसके उठाव को लेकर ना प्रशासन ने कभी सुध ली और ना ही सरकार ने कभी ध्यान दिया।उठाव ना होने से समितियों में बचे धान को लेकर समिति प्रबंधकों को भारी चिंता है आये दिन मौसम के बदलते मिजाज ने खरीदी प्रभारीयों के रातों के निंद उड़ा दिये है तो वहीं पहले ही उठाव में हुई देरी के चलते सुखत का नुक़सान झेल चुके हैं ,प्रत्येक खरीदी केन्द्र में 70 से 80 क्विंटल के सुखत का अनुमान है जिसका भार भी केन्द्र के प्रभारी पर पडने वाला है।
*सरकार के निर्देश का अवमानना किसने किया कौन है नुकसान का जिम्मेदार?*
खरीदी से पहले राज्य सरकार ने धान खरीदी के 72 घंटे के भीतर उपार्जन के उठाव के निर्देश दिये थे मगर प्रशासनिक उदासीनता के चलते सम्पूर्ण उठाव के लिये अब तक मिलर्स को ना डिलीवरी आर्डर (डीओ)कटा और ना ही संग्रहण केन्द्रों के लिये ट्रांसफर आर्डर (टीओ) कटा।ऐसे में ट्रांसपोर्टर भी उठाव नहीं कर रहे हैं जिससे खरीदी केन्द्रों में धान खुले में पड़ा हुआ है।उठाव के लिये टीओ और डीओ काटने का अधिकार जिला मार्केटिंग अफिसर (डीएमओ) के पास होता है।समिति प्रभारी चाहता है उठाव पूरी तरह खत्म हो जाये,ट्रांस्पोर्टर के पास उठाव के लिये आर्डर नहीं ऐसे नुकसान का जिम्मेदार कौन यह स्पष्ट हो जाता है।
*साहेब डीओ नहीं तो टीओ तो काट दीजिए होने वाले नुकसान से बचा लिजिये*
खरीदी समाप्त हुये माहभर से ज्यादा समय हो गया दरअसल खरीदी 21क्विंटल होने से कस्टम मलिंग के लिये मिलर्स की क्षमता उतनी नहीं है इसलिये डीओ नहीं कट रहा इधर जिला अधिकारी संग्रहण केन्द्रों के लिये टीओ नहीं काट रहे हैं उठाव नहीं हो रहा है खरीदी के उपार्जन केन्द्रों में पड़ा हुआ है ऐसे में परेशान समिति प्रबंधक और केन्द्र प्रभारी कह रहे साहेब कुछ तो करो नुकसान से बचा लो।
*उठाव को लेकर क्या कहते हैं जिले के डीएमओ साहब*
बचे हुये धान के उठाव को लेकर जिला मार्केटिंग अफसर अमित चंद्राकर ने कहा एक हफ्ते के भीतर सम्पूर्ण उठाव हो जायेगा। उठाव तो सभी ब्लाकों में बराबर हो रहें हैं दरअसल 21क्विंटल के खरीदी हुयी है जिले के मिलर्स की क्षमता अनुरूप नहीं है इसलिये उठाव शेष रह गये है उन्होंने कहा इसके लिये अंतर जिला से सम्पर्क कर रहे हैं ताकि उठाव समाप्त हो जाये।

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