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Durgkondal: लगातार बारिश से दुर्गूकोदल में धान की फसल पर कीटों का हमला*

 *लगातार बारिश से दुर्गूकोदल में धान की फसल पर कीटों का हमला*

*महू और तनाछेदक कीट से किसान परेशान, बारिश के कारण दवाई छिड़काव में दिक्कत*



दुर्गूकोदल।विकासखंड दुर्गूकोदल में लगातार हो रही बारिश ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरे रहने और वातावरण में लगातार उमस के चलते धान की फसल में कीट एवं रोगों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। किसानों का कहना है कि धान की बाली निकलते ही महू (Aphid) और तना छेदक (Stem Borer) जैसे कीटों ने हमला शुरू कर दिया है।लगातार बारिश के कारण किसान कीटनाशक का छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं, जिससे फसल पर नुकसान का खतरा और बढ़ गया है।किसान परेशान, उत्पादन पर असर की आशंका क्षेत्र के किसान रामचंद्र कल्लो, जोहन गावड़े, विजय पटेल, तोरण दुग्गा, परदेसीराम मंडावी, रविंद्र मडावी और रेखलाल विश्वकर्मा ने बताया कि इस बार मौसम की बेरुखी ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ दी है। सालभर की मेहनत से तैयार धान अब पकने के मुहाने पर है, लेकिन बारिश और कीट प्रकोप ने फसल को संकट में डाल दिया है। किसानों का कहना है कि लगातार पानी गिरने से फसल झुकने लगी है और खेतों में छिड़काव करना संभव नहीं हो पा रहा है।पहले ही बीज और खाद की महंगाई से किसान परेशान थे, अब कीटनाशक दवाइयों का समय पर छिड़काव न होने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका है।तकनीकी जानकारी : विशेषज्ञों की राय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय धान की फसल में महू कीट (Aphid) तने का रस चूसकर पौधे को कमजोर कर देता है, जिससे दाने अधूरे और हल्के रह जाते हैं। वहीं तना छेदक (Stem Borer) कीट तने को काटकर अंदर घुस जाता है, जिससे बालियां सफेद होकर सूखने लगती हैं।महू की रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल या थायमेथोक्साम 25 डब्ल्यूजी का छिड़काव किया जाता है।तना छेदक नियंत्रण के लिए क्लोरेंट्रानिलिप्रोल याकार्बोफ्यूरान ग्रैन्यूल प्रभावी मानी जाती है।लेकिन लगातार बारिश और खेतों में पानी भरे होने के कारण किसान यह छिड़काव नहीं कर पा रहे हैं.किसानों का कहना है कि दुर्गूकोदल क्षेत्र में इस तरह की स्थिति पहली बार बनी है। इस वर्ष क्षेत्र में अब तक अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिससे खेतों में जलभराव बढ़ गया है। किसान आशंकित हैं कि यदि मौसम जल्द नहीं खुला तो धान की फसल का उत्पादन आधा भी नहीं हो पाएगा।किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से मदद की मांग करते हुए कहा है कि फसल खराब होने की स्थिति में बीमा क्लेम और मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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