*दुर्गूकोंदल में जलसंकट गहराया : पानी की टंकियां बनीं शोपीस, ग्रामीण झरिया क पानी पीने को मजबूर*
*नल-जल योजना की जमीनी हकीकत उजागर : महीनों से नहीं मिला नल से पानी, ग्रामीणों की व्यथा अनसुनी*
दुर्गूकोंदल विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत तराईघोटिया के आश्रित ग्राम रसोली, नागहुर और नेडगांव में ग्रामीण बुनियादी जरूरत पीने के पानी के लिए आज भी संघर्ष कर रहे हैं। जल जीवन मिशन के तहत इन गांवों में पानी की टंकियों का निर्माण और नल कनेक्शन तो दिया गया, लेकिन पानी की आपूर्ति शुरू हुए कुछ ही दिन हुए और फिर बंद हो गई। परिणामस्वरूप, लाखों रुपए की योजनाएं आज गांवों में शोपीस बनकर खड़ी हैं।ग्रामीणों ने बताया कि टंकी निर्माण के बाद मात्र 6 से 7 दिनों तक ही नलों से पानी मिला, इसके बाद से टंकी खाली पड़ी है। पाइप लाइन होने के बाद भी गांवों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। रसोली और नागहुर में लगाई गई सौर पम्प और प्लेटें महीनों से खराब पड़ी हैं। क्रेडा विभाग और जिला प्रशासन को कई बार जानकारी देने और आवेदन करने के बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकल सका है।स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि ग्रामीणों को नदी के किनारे झरिया बनाकर उसी जगह से छनकर आने वाले पानी को पीना पड़ रहा है। पहले गांव में एक हैंडपंप था, जो खराब होने के बाद किसी ने उसे सुधारा तक नहीं। मजबूरी में ग्रामीण नदी से पानी भरकर घर लाते हैं और वहीं से निस्तारी से लेकर पीने तक की जरूरतें पूरी करते हैं।गांव की सरपंच जबाय बाई नुरेटी ने भी स्वीकार किया कि ग्रामीणों की जल समस्या काफी पुरानी है। उन्होंने कहा हमने कई बार विभाग को आवेदन किया, अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन समस्या जस की तस है। हमारे लोग झरिया का पानी पी रहे हैं, यह अत्यंत दुखद स्थिति है।इधर प्रशासन दावा जरूर कर रहा है कि जल्द ही समस्या दूर की जाएगी, लेकिन महीनों से प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीणों को अब सरकारी वादों पर भरोसा नहीं रह गया है। जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ जल पहुंचाना था, परंतु जमीनी हकीकत इस मिशन पर सवाल खड़ा कर रही है।


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