*178वीं वाहिनी बीएसएफ के तत्वावधान में खो-खो प्रतियोगिता का सफल आयोजन*
*खेल से बढ़ेगा अनुशासन और सौहार्द, मंडागांव की टीम विजयी*
दुर्गूकोदल।178वीं वाहिनी, सीमा सुरक्षा बल, दुर्गकोंडल द्वारा सीमावर्ती ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और युवाओं को खेलों से जोड़ने और उनमें अनुशासन तथा टीम भावना का विकास करने के उद्देश्य से खो-खो प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन में बीएसएफ के जवानों के साथ-साथ आसपास के गांवों के युवाओं व स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया। प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना, युवाओं को नशे और भटकाव से दूर रखना तथा बीएसएफ और स्थानीय समुदाय के बीच आपसी सौहार्द एवं विश्वास को सुदृढ़ करना था।कार्यक्रम का आयोजन 178वीं वाहिनी के कार्यवाहक कमांडेंट श्री शैलेन्द्र शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उनके नेतृत्व में बीएसएफ लगातार सीमावर्ती क्षेत्रों में सामाजिक व जनकल्याणकारी गतिविधियों का संचालन कर रही है, जिससे स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान और आत्मीयता की भावना बढ़ रही है। कार्यक्रम में उप समादेष्टा श्री गुरु चरण सिंह, चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि कुमार, अन्य अधिकारी, अधीनस्थ अधिकारी, जवान तथा ग्रामीण क्षेत्र के अनेक नागरिक उपस्थित रहे।खो-खो प्रतियोगिता का रोमांचक मुकाबला भूस्की और मंडागांव की टीमों के बीच हुआ। दोनों टीमों ने शानदार खेल तकनीक, फुर्ती और अनुशासन का परिचय देते हुए दर्शकों को बांधे रखा। कड़े संघर्ष और कड़ी टक्कर के बाद मंडागांव की टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विजयी ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। वहीं भूस्की की टीम उपविजेता रही।कार्यक्रम के समापन पर विजेता एवं उपविजेता खिलाड़ियों को बीएसएफ अधिकारियों द्वारा पुरस्कृत किया गया तथा भविष्य में बेहतर प्रदर्शन और उच्च स्तरीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया। चयनित खिलाड़ियों की एक टीम अब 178वीं वाहिनी का प्रतिनिधित्व करते हुए क्षेत्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेगी।इस आयोजन ने न केवल युवाओं को खेलों के प्रति प्रोत्साहित किया, बल्कि बीएसएफ और स्थानीय जनता के बीच एकता, विश्वास और सहयोग की नई मिसाल भी पेश की। खेल के माध्यम से न केवल शारीरिक क्षमता का विकास होता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण, अनुशासन और सामुदायिक सौहार्द की भावना भी मजबूत होती है। यह आयोजन सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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