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Durgkondal: अगहन गुरुवार महालक्ष्मी व्रत की विधि-विधान के साथ आराधना प्रारंभ*

 *अगहन गुरुवार महालक्ष्मी व्रत की विधि-विधान के साथ आराधना प्रारंभ*

*सौभाग्य एवं समृद्धि की कामना हेतु सुहागिनें कर रही विशेष पूजा*



दुर्गूकोदल।आज अगहन माह के प्रथम गुरुवार के अवसर पर क्षेत्र के गांव-ग्राम सहित कस्बों में महालक्ष्मी व्रत एवं पूजन विधि-विधान के साथ प्रारंभ हुआ। प्रातःकाल से ही श्रद्धालु महिलाएँ स्नान-ध्यान कर माता लक्ष्मी की आराधना में निमग्न हो गईं। अगहन गुरुवार के इस विशेष पर्व पर घरों में शुद्धता, स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है।आज प्रातःकाल पूजा के दौरान लक्ष्मी एवं तुलसी का संयुक्त पूजन किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता लक्ष्मी को भगवान विष्णु की सहचरी एवं उनके श्रीचरणों में सदा विराजमान माना गया है, इसलिए इस दिन लक्ष्मी-नारायण के रूप में पूजन का विशेष महत्व होता है। सुहागिन स्त्रियाँ अगहन गुरुवार का व्रत रखकर अपने घर में सुख-शांति, सौभाग्य तथा धन-वैभव की वृद्धि की कामना करती हैं।व्रत विधान के अनुसार, सुबह घर के मुख्य द्वार पर चावल या रोली से माता लक्ष्मी के चरण चिन्ह बनाए जाते हैं। ऐसा करने से यह प्रतीक माना जाता है कि माता लक्ष्मी स्वयं ग्रृह में प्रवेश कर रही हैं। इसके पश्चात दीप प्रज्वलित कर, धूप-नैवेद्य, फल, पंचामृत तथा प्रसाद अर्पित किया जाता है। कई स्थानों पर महिलाएँ समूह में भजन-कीर्तन एवं लक्ष्मी स्तुति का आयोजन भी करती हैं।

धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि अगहन गुरुवार का व्रत करने से घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है तथा परिवार में चल रही बाधाएँ और कष्ट दूर होते हैं। यह व्रत पति-पत्नी के दांपत्य जीवन में सौहार्द और स्थिरता लाने वाला माना गया है। ऐसा भी कहा जाता है कि महालक्ष्मी व्रत से माता प्रसन्न होकर अपने भक्तों के घर में स्थायी निवास करती हैं और गरीबी दूर होती है।

इस प्रकार आज पूरे क्षेत्र में अगहन गुरुवार का पावन पर्व आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक श्रद्धा के साथ श्रद्धापूर्वक मनाया जा रहा है।

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