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Durgkondal: दुर्गूकोंदल में सरपंच-सचिवों के लिए ग्राम पंचायत विकास योजना पर एक दिवसीय प्रशिक्षण*

 *दुर्गूकोंदल में सरपंच-सचिवों के लिए ग्राम पंचायत विकास योजना पर एक दिवसीय प्रशिक्षण*

 

*44 ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा, स्थानीय शासन को सुदृढ़ बनाने पर दिया जोर*



दुर्गूकोंदल।जनपद पंचायत दुर्गूकोंदल में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कार्यक्रम के अंतर्गत ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) के उन्मुखीकरण हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में दुर्गूकोंदल क्षेत्र की सभी 44 ग्राम पंचायतों के सरपंच व सचिव शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर पर विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने की प्रक्रिया, प्राथमिकताएँ निर्धारित करने की विधि, बजट आवंटन और प्रभावी क्रियान्वयन की समझ को मजबूत करना था।

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि ग्राम पंचायत विकास योजना एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें ग्राम के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता अनिवार्य होती है। गांव की जरूरतों और विकास की दिशा को समझकरयोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से तैयार किया जाना चाहिए, ताकि अंतिम रूप से तैयार होने वाली योजना गांव की वास्तविक मांगों को पूरा कर सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पारदर्शिता और जनभागीदारी ही सफल पंचायत प्रशासन की मूल नींव है।कार्यक्रम में 65 से अधिक प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान सरपंचों एवं सचिवों ने अपने अनुभव साझा किए और विकास कार्यों को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए नए सुझाव प्राप्त किए। प्रतिभागियों ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण से योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में आसानी होती है और ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों में गति आती है।

जनपद पंचायत दुर्गूकोंदल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरेंद्र बंजारे ने कहा कि पंचायतें स्थानीय शासन की सबसे मजबूत इकाई हैं, इसलिए उनके प्रतिनिधियों का दक्ष होना अत्यंत आवश्यक है। अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी आर.डी. ठाकुर ने ग्राम विकास योजनाओं में सटीक डेटा और सामाजिक सर्वेक्षण को महत्वपूर्ण बताया। मनरेगा कार्यक्रम अधिकारी आशीष सोनकर ने बताया कि GPDP निर्माण के दौरान रोजगार सृजन कार्यों की योजना पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।प्रदान संस्था से जैलू, हिमांशु, विजय और जयप्रकाश कुलदीप ने मुख्य प्रशिक्षक के रूप में तकनीकी बिंदुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने डिजिटल टूल्स के उपयोग, गतिविधियों के दस्तावेजीकरण, सामाजिक ऑडिट एवं निगरानी तंत्र पर भी जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने सीखी गई बातों को व्यवहार में लाकर अपने-अपने ग्राम विकास को मजबूत करने का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम स्थानीय शासन को सशक्त एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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