कोटा/ बेलगहना....
केंद्र सरकार की बहुचर्चित और महत्वाकांक्षी जनमन योजना ज़मीन पर उतरते ही सवालों के घेरे में आ गई है। उद्देश्य था—विशेष पिछड़ी जनजातियों और दूरस्थ ग्रामीण अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना, लेकिन कोटा विकासखंड की ग्राम पंचायत करहीकच्छार के बैगा मोहल्ला में जो तस्वीर सामने आई है, उसने इस “विकास” की पोल खोलकर रख दी है।
सड़क बनी… मगर बीच सड़क में खंभा!
निर्माणाधीन सड़क पर ऐसा करिश्मा हुआ कि बीच सड़क में बिजली का खंभा तान दिया गया। नतीजा—
ट्रैक्टर, पिकअप और चारपहिया वाहन तो छोड़िए,
दोपहिया निकालना भी जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।
ग्रामीण पूछ रहे हैं—क्या अब सड़क खंभे को देखकर मुड़ेगी या खंभा सड़क के लिए हटेगा?
बिना प्लानिंग, बिना समन्वय—बस कागज़ी विकास
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण शुरू करने से पहले बिजली विभाग से कोई समन्वय नहीं किया गया। न खंभा हटाया गया, न वैकल्पिक व्यवस्था की गई। नतीजा यह कि सड़क के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है, सुविधा नहीं दी जा रही।
संदीप शुक्ला का तीखा हमला
मामले पर पूर्व जनपद अध्यक्ष कोटा संदीप शुक्ला ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा—
“जनमन जैसी गंभीर योजना में ऐसी लापरवाही शर्मनाक है। विकास इतना अंधा हो गया है कि सड़क के बीच खंभा और पेड़ भी नहीं दिख रहा। यह विकास नहीं, जनता के साथ मज़ाक है।”
उन्होंने आगे कहा कि बैगा समाज पहले से उपेक्षा का शिकार रहा है, और अब सड़क जैसी मूलभूत सुविधा में भी यह हाल शासन-प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
बरसात में बढ़ेगा खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि खंभे की वजह से वाहन चालकों को सड़क से नीचे उतारकर कच्चे और संकरे रास्तों से निकलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। बरसात में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
इंजीनियर की सफाई, लेकिन सवाल कायम
पीएमजीएसवाई के इंजीनियर ने सफाई देते हुए कहा—
“खंभा हटाने के लिए बिजली विभाग को आवेदन दिया गया है, प्रक्रिया पूरी होते ही समस्या दूर कर दी जाएगी।”
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि—
जब योजना पहले से तय थी, तो बाधाएं पहले क्यों नहीं हटाई गईं?
वहीं सीसी सड़क के लिए भी लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं।
क्या जनता की सुरक्षा से ज़्यादा ज़रूरी कागज़ी प्रगति है?
जनमन या जन-भ्रम?
अब ग्रामीण प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। देखना होगा कि खंभा हटता है या भरोसा, और जनमन योजना वास्तव में बैगा समाज के लिए वरदान बनती है या फिर लापरवाही की एक और मिसाल बनकर रह जाती है।


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