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New Delhi: CGVTV NATION* *भारत को मिला नया उपराष्ट्रपति – लोकतंत्र के मंदिर में गूँजी शपथ की गूँज*

 *CGVTV NATION* *भारत को मिला नया उपराष्ट्रपति – लोकतंत्र के मंदिर में गूँजी शपथ की गूँज*


Cgvtv संवाददाता की विशेष रिपोर्ट


नई दिल्ली....

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में आज का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हॉल में आयोजित ऐतिहासिक समारोह में भारत के नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।



राष्ट्रपति ने उन्हें पद की शपथ दिलाई और इसके साथ ही वह देश के संविधान के दूसरे सर्वोच्च पद पर आसीन हो गए।


नए उपराष्ट्रपति के चयन को लेकर देशभर में चर्चा थी। मतगणना पूरी होने के बाद उनकी जीत ने साफ कर दिया कि विपक्ष के तमाम समीकरण धरे रह गए और सत्ता पक्ष ने रणनीतिक जीत दर्ज की।


समारोह में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, न्यायपालिका और सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी ने इस पल को और खास बना दिया।

सीपी राधाकृष्णन ने विपक्ष के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों से हराया और भारत के 15वें उपराष्ट्रपति बने। वह एनडीए के उम्मीदवार थे और उन्हें 452 वोट मिले, जबकि बी सुदर्शन रेड्डी को 300 वोट मिले।


- सी पी राधाकृष्णन महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल हैं और झारखंड के राज्यपाल के रूप में भी काम कर चुके हैं।

- वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ जुड़े रहे हैं और उनके राजनीतिक सफर में चार दशकों से अधिक का अनुभव है।

- वह तमिलनाडु के गौंडर-कोंगु वेल्लाला समुदाय से आते हैं और उन्हें स्थानीय लोग "कोयंबटूर का वाजपेयी" कहते हैं।


उपराष्ट्रपति का पहला बयान


शपथ लेने के बाद उन्होंने कहा –

“मैं संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं को सर्वोच्च मानते हुए सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा। भारत की जनता ने जो विश्वास जताया है, उस पर खरा उतरना ही मेरी प्राथमिकता होगी।”


उपराष्ट्रपति पद की अहमियत


भारत का उपराष्ट्रपति न सिर्फ राज्यसभा का सभापति होता है बल्कि संकट की स्थिति में राष्ट्र की कमान संभालने की भी जिम्मेदारी निभा सकता है। यही कारण है कि इस पद को लेकर हमेशा खास दिलचस्पी बनी रहती है।


राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल गूँज रहा है कि नए उपराष्ट्रपति के नेतृत्व में राज्यसभा का माहौल कितना बदलेगा और क्या वे सरकार और विपक्ष के बीच संतुलन साध पाएंगे।

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