बिलासपुर / सिरगिट्टी क्षेत्र स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर (स्वास्थ्य केंद्र) में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर उजागर हुई है। यहां पदस्थ डॉ. हर प्रसाद मेश्राम व RMO रजनी रघुवंशी की लगातार अनुपस्थिति से पूरा अस्पताल व्यवस्था के बजाय अव्यवस्था का केंद्र बन गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि अस्पताल में डॉक्टरों की गैरमौजूदगी के बीच कंपाउंडर ही मरीजों को बिना किसी चिकित्सकीय जांच के दवाइयाँ बांट रहा है, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ माना जा रहा
है।
इस गंभीर लापरवाही का खुलासा उस समय हुआ जब सिरगिट्टी मंडल उपाध्यक्ष निक्की दुबे ने स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में डॉक्टरों की कुर्सियां खाली मिलीं, जबकि पर्ची काटने वाला कर्मचारी भी मौके से गायब था। जिम्मेदार स्टाफ की गैरहाजिरी के बीच मरीजों की लंबी कतारें लगी रहीं और कंपाउंडर द्वारा बिना जांच दवाइयाँ थमाई जाती रहीं, जो स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है कड़कती धूप और भीषण गर्मी के बीच दूर-दराज गांवों से इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीज घंटों तक अस्पताल परिसर में भटकते रहे, लेकिन उन्हें देखने वाला कोई जिम्मेदार डॉक्टर मौजूद नहीं था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डॉ. हर प्रसाद मेश्राम और RMO रजनी रघुवंशी महीने में महज एक या दो दिन ही अस्पताल का रुख करते हैं, जिससे क्षेत्र की हजारों की आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हो रही है।
निरीक्षण के बाद मंडल उपाध्यक्ष निक्की दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्वास्थ्य केंद्र की यह स्थिति बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि मरीजों की जान के साथ इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद जब उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति देखी, तो अस्पताल में फैली अव्यवस्था और जिम्मेदारों की लापरवाही साफ तौर पर सामने आ गई।
निक्की दुबे ने चेतावनी दी है कि इस गंभीर मामले की शिकायत शीघ्र ही स्वास्थ्य मंत्री एवं जिला कलेक्टर से की जाएगी। साथ ही लापरवाही बरतने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की जाएगी, ताकि स्वास्थ्य केंद्रों में जवाबदेही तय हो और मरीजों को समय पर उचित इलाज मिल सके।
ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि "हम लोग दूर-दराज गांवों से इलाज के लिए अस्पताल आते हैं, लेकिन यहां डॉक्टर महीनों तक दिखाई नहीं देते। कई बार तो महीने में केवल एक-दो दिन ही डॉक्टर आते हैं, बाकी दिनों कंपाउंडर के भरोसे ही अस्पताल चलता है। बिना जांच दवाई दे दी जाती है, जिससे हमें अपनी सेहत को लेकर डर बना रहता है। कड़कती धूप में घंटों इंतजार करने के बाद भी जब डॉक्टर नहीं मिलते, तो मजबूर होकर बिना इलाज ही वापस लौटना पड़ता है।"



0 Comments