बेलगहना....टेंगनमाड़ा निवासी भारतीय रेलवे में 36 वर्षों तक निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ सेवा देने वाले राजकुमार बुनकर 60 वर्ष की आयु पूर्ण करने के उपरांत गार्ड के पद से सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए। उनके सम्मान में आयोजित विदाई समारोह में रेलवे अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनके उत्कृष्ट सेवाकाल की सराहना करते हुए स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घ सेवानिवृत्त जीवन की शुभकामनाएँ दीं।
श्री राजकुमार बुनकर ने वर्ष 1990 में प्रथम यातायात सहायक के पद पर भारतीय रेलवे में अपनी सेवा यात्रा प्रारंभ की। बाद में वे यातायात सहायक-2 के पद पर पदोन्नत हुए। इसके पश्चात उन्होंने स्टेशन बिजरी, बिलासपुर, खोंगसरा तथा अंत में पेंड्रा स्टेशन में अपनी सेवाएँ दीं। लगभग 36 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने अपनी कर्तव्यनिष्ठा, समयपालन, अनुशासन एवं ईमानदारी से रेलवे विभाग में विशिष्ट पहचान बनाई।
वर्ष 2022 में ड्यूटी के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होने के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। कठिन परिस्थितियों से उबरकर उन्होंने पुनः अपने दायित्वों का निर्वहन किया और पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी 60 वर्ष की आयु तक 36 वर्षों की सेवा सफलतापूर्वक पूर्ण की। उन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में कभी भी लापरवाही नहीं बरती। रेलवे जैसी चुनौतीपूर्ण और जिम्मेदारीपूर्ण सेवा में समय की पाबंदी एवं सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान रही।
विदाई समारोह में अपने उद्बोधन के दौरान श्री बुनकर ने कर्मचारियों को कर्तव्यनिष्ठा एवं सुरक्षा का संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक कर्मचारी को पूरे मनोयोग और लगन से कार्य करना चाहिए। उन्होंने गार्ड की ब्रेक वैन को सदैव स्वच्छ रखने, धैर्यपूर्वक कार्य करने, कठिनाइयों से न घबराने तथा रेलवे जैसे संवेदनशील विभाग में हर समय सतर्क रहने की सीख दी।
इस अवसर पर रेलवे के गार्ड, स्टेशन प्रबंधक, डीटी साहब तथा बड़ी संख्या में रेलवे अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने राजकुमार बुनकर को भावभीनी विदाई दी तथा उनके स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घ जीवन की मंगलकामनाएँ व्यक्त कीं।
विदाई समारोह का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब उनके पुत्र ने मंच से अपने पिता के सम्मान में भावपूर्ण संबोधन दिया। पुत्र एवं पुत्री के शब्दों को सुनकर राजकुमार बुनकर की आँखें नम हो गईं और समारोह में उपस्थित सभी लोग भावुक हो उठे।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए रेलवे परिवार ने श्री बुनकर से "रेलवे के नाम एक वृक्ष" अभियान के अंतर्गत एक पौधा भी रोपित कराया। यह क्षण उनके सम्मान समारोह का विशेष आकर्षण रहा।
सेवानिवृत्ति के पश्चात अपने गृह ग्राम टेंगनमाड़ा पहुँचने पर उनका भव्य स्वागत किया गया। उनकी धर्मपत्नी रुक्मणी बुनकर ने आरती उतारकर उनका गृह प्रवेश कराया। चारों बच्चों, परिजनों एवं ग्रामवासियों ने पुष्पमालाओं एवं शुभकामनाओं के साथ उनका आत्मीय अभिनंदन किया।
सम्पूर्ण रेल परिवार एवं टेंगनमाड़ा क्षेत्र के लोगों ने श्री राजकुमार बुनकर की 36 वर्षों की उत्कृष्ट एवं अनुकरणीय सेवा पर गर्व व्यक्त करते हुए उनके स्वस्थ, सुखमय एवं दीर्घ सेवानिवृत्त जीवन की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।



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