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BALRAMPUR: तीन माह का अंगूठा, दो माह का राशन ! बलरामपुर के चीनिया में ग्रामीणों का हंगामा, एसडीएम से की जांच की मांग

 तीन माह का अंगूठा, दो माह का राशन ! बलरामपुर के चीनिया में ग्रामीणों का हंगामा, एसडीएम से की जांच की मांग

बलरामपुर जिले के रामचंद्रपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चीनिया की शासकीय उचित मूल्य दुकान में राशन वितरण को लेकर गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि तीन माह का अंगूठा लगवाने के बावजूद उन्हें केवल दो माह का राशन दिया गया। मामले से नाराज बड़ी संख्या में ग्रामीण गुरुवार को रामानुजगंज एसडीएम कार्यालय पहुंचे और निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत चीनिया के आश्रित ग्राम शिवपुर सहित कई हितग्राहियों से अप्रैल, मई और जून माह के नाम पर अंगूठा लगवाया गया, लेकिन राशन केवल दो माह का दिया गया। उनका कहना है कि सरकार के निर्देशानुसार मई, जून और जुलाई माह का राशन एकमुश्त मिलना था, इसके बावजूद उन्हें पूरा खाद्यान्न नहीं मिला। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राशन दुकान संचालक पहले हितग्राहियों से बायोमेट्रिक सत्यापन (अंगूठा) करवा लेता है और बाद में पूरा राशन नहीं देता।


इतना ही नहीं, राशन कार्ड में "बाकी" लिखकर कार्ड वापस कर दिया जाता है, जबकि ऐसा करने का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। मामले को लेकर गुरुवार दोपहर बड़ी संख्या में ग्रामीण रामानुजगंज एसडीएम कार्यालय पहुंचे। उन्होंने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के नाम तहसीलदार मनोज पैकरा को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी राशन दुकान संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। इस संबंध में खाद्य निरीक्षक छबीला पैकरा ने बताया कि ग्राम पंचायत चीनिया के हितग्राहियों से आवेदन प्राप्त हुआ है।

शिकायत में जून और जुलाई माह का राशन नहीं मिलने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अंगूठा लगवाकर राशन नहीं देने के आरोप पर खाद्य निरीक्षक ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह संभावना हो सकती है कि तीन माह का अंगूठा लगवाकर केवल दो माह का राशन दिया गया हो, लेकिन वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राशन कार्ड में केवल उतनी ही मात्रा दर्ज की जाती है, जितना राशन हितग्राही को दिया जाता है। "बाकी" लिखने का कोई प्रावधान नहीं है। यदि ऐसा पाया जाता है तो इसकी भी जांच की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच शुरू होने के बाद ग्रामीणों की निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। यदि शिकायत सही साबित होती है तो सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गंभीर अनियमितता उजागर हो सकती है और संबंधित जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की संभावना है।

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