सरकार का जतन फेल तो जर्जर भवन में लग रहा पाठशाला
*आखिर धूपकोट के प्राथमिक शाला को भवन समस्या से कब मिलेगा निजात
देवभोग--पिछली सरकार के कार्यकाल में स्कूल जतन योजना के नाम से गरियाबंद के देवभोग मैनपुर छुरा राजिम फिंगेश्वर सहित सभी ब्लाक के स्कूलों के मरम्मत के लिये लाखों खर्च किये गये पर स्कूल के जतन तो हो ना सके मगर ठेकेदारों का जमकर जतन हुआ।ग्रामीण इलाकों में जर्जर भवन जब के तस है और शिक्षक इन जर्जर भवनों में पाठशाला लगाने मजबूर है।देवभोग ब्लाक के धूपकोट के बंदपारा स्थित प्राथमिक शाला का जर्जर भवन इसी जतन योजना में शामिल था स्कूल जतन ना हो सका तो प्रथमिक वाला उसी जर्जर भवन पर ही लग रहा है बरसात के दिनों जर्जर भवन में लग रहे पाठशाला में अनहोनी घटना का डर बना हुआ है।
आखिर अधिकारी ऐसे स्कूलों की सुध लेने क्यों नहीं पहुंच रहे हैं?
स्थानीय प्रशासन को भी इस बात की जानकारी है मगर उन्होंने अभी तक सुध नहीं ली है क्या स्थानीय प्रशासन को किसी अनहोनी घटना होने का इंतजार है या ऐसी कौन सी मजबूरी है जो जर्जर भवन की मरम्मत नहीं करा पा रहे हैं आखिर शिक्षा विभाग योजना के लागू होने के लगभग दो साल बाद भी ठेकेदार से कार्य पूर्ण नहीं करा सकी ग्रामीणों के मन में सबसे बड़ा सवाल है।
बरामदे में पांच कक्षायें ग्रामीण शिक्षा पर लगा पलीता
प्राथमिक शाला धूपकोट में कक्षा पहली से पांचवीं तक कुल 32 दर्ज संख्या है कक्षों की स्थिति बैठने लायक नहीं इसलिये शिक्षक पांच कक्षाओं को बरामदें में शिक्षा दे रहे हैं ऐसे में शिक्षा का गुणवत्ता कैसे सुदृढ़ हो सकेगा।शाला में दो शिक्षक एक स्वीपर पदस्थ हैं पौन घंटे के कालखंड में पांच कक्षाओं को एक साथ शिक्षा देना संभव नहीं है इसलिये शिक्षा का स्तर न्यून से न्यूनतम हो गया है।एक शिक्षक विषय लेता तो दूसरे को मजबूरी में बैठे रहना पड़ रहा है आखिर इस स्तरहीन शिक्षा और भवन समस्या का जिम्मेदार कौन? इसका जबाब ना ग्रामीणों को और ना ही जर्जर भवन में शिक्षा को मजबूर बच्चों को मिल सका है।
धूपकोट बंदपारा के प्राथमिक शाला के लिये एक निजी भवन की वैकल्पिक व्यवस्था कर ली गयी है और मरम्मत तो फिलहाल संभव नहीं है अतिरिक्त कक्ष की मांग सौंपी गयी है आगे स्वीकृति मिलेगी तो समस्या का निदान हो जायेगा।
निलाम्बर कश्यप
ब्लाक शिक्षा अधिकारी देवभोग


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