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*कोटा जनपद की कार्यप्रणाली पर सवाल, रश्मि दीक्षित बोलीं- जांच नहीं हुई तो कार्यालय के सामने धरना*



बिलासपुर (छत्तीसगढ़): कोटा जनपद पंचायत में कथित मनमानी और भ्रष्टाचार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पंचायती राज के नियमों की अनदेखी से आहत जनपद सदस्य श्रीमती रश्मि घनश्याम दीक्षित (करगी खुर्द) ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। आगामी 5 नवंबर 2026 को होने वाली सामान्य सभा की बैठक का बहिष्कार करते हुए उन्होंने पंचायत के कथित अनियमितताओं की शिकायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) से की है। सदस्य ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो वे पीएमओ एवं सीएमओ तक शिकायत पहुंचाने के साथ जनपद कार्यालय के सामने धरना देंगी।


*नियमों की अनदेखी, जनप्रतिनिधियों के सम्मान पर सवाल*


जनपद सदस्य के अनुसार, सामान्य सभा की बैठक से सात दिन पूर्व एजेंडा एवं आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना अपेक्षित है, लेकिन कोटा जनपद में 3 नवंबर को लिखित एवं व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना देकर महज औपचारिकता निभाई गई। इस रवैये को जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और सम्मान की अनदेखी बताते हुए उन्होंने बैठक का बहिष्कार किया है।



*भ्रष्टाचार के चार प्रमुख मुद्दों पर उठाए सवाल*


16वें वित्त आयोग की राशि: सदस्य ने फंड के कथित अनियमित एवं नियम विरुद्ध आबंटन और सामान्य सभा में इसे पारित कराने के प्रयास पर सवाल उठाए हैं।


प्रधानमंत्री आवास योजना: योजना के नाम पर कथित अवैध वसूली और भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की मांग की गई है।


खनिज एवं रेत घाट: गौठान खनिज राशि के वितरण में अनियमितता और रेत घाटों से कथित अवैध वसूली का मुद्दा उठाया गया है।


आंगनवाड़ी भर्ती: नियुक्ति प्रक्रिया में कथित मनमानी एवं अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।




*श्रीमती रश्मि घनश्याम दीक्षित, जनपद सदस्य करगी खुर्द, कोटा ने कहा—*


“जनपद पंचायत कोटा में जनप्रतिनिधियों के अधिकारों और पंचायती राज के नियमों की लगातार अनदेखी की जा रही है। सामान्य सभा की बैठक से पहले निर्धारित समय पर एजेंडा और आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान है। 16वें वित्त आयोग की राशि, प्रधानमंत्री आवास योजना, खनिज राशि, रेत घाटों और आंगनवाड़ी भर्ती में सामने आई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मैंने 4 नवंबर को CEO को लिखित शिकायत सौंपकर एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। यदि निर्धारित समय में जांच और कार्रवाई नहीं होती है, तो मैं पीएमओ एवं मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत करूंगी और जनपद पंचायत कार्यालय के सामने धरने पर बैठने के लिए बाध्य होऊंगी। भ्रष्टाचार और मनमानी के खिलाफ मेरी लड़ाई जारी रहेगी।”


*आर-पार की लड़ाई का ऐलान*


4 नवंबर 2026 को सौंपे गए शिकायत पत्र के माध्यम से जनपद सदस्य ने प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया है। अब देखना होगा कि कोटा जनपद पंचायत में उठे इन गंभीर सवालों पर प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और कथित अनियमितताओं की जांच कब शुरू होती है।

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