गौ सेवक एवं कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता शोषण के शिकार – शिवसेना
राजनांदगांव। प्रदेशभर में गौ माता की सेवा करने वाले हजारों गौ सेवक एवं कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता आज बदहाल स्थिति में काम करने को मजबूर हैं। शिवसेना ने आरोप लगाया है कि शासन-प्रशासन द्वारा न तो इन्हें मानदेय दिया जा रहा है और न ही किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
शिवसेना पदाधिकारियों ने बताया कि ये गौ सेवक 24 घंटे गौ सेवा में लगे रहते हैं, लेकिन इनके पास न टॉर्च, न जूते, न रैनकोट और न ही सुरक्षा किट उपलब्ध है। यहां तक कि टीकाकरण की राशि भी समय पर नहीं मिलती।
प्रदेश अध्यक्ष किसान सेना राकेश श्रीवास्तव, प्रदेश सचिव कमल सोनी, महामंत्री मनीष तिवारी, शोभा शंकर त्रिपाठी एवं दिनेश ताम्रकार ने कहा कि वर्षों पहले शासन ने युवाओं को 6 माह का प्रशिक्षण देकर कृत्रिम गर्भाधान, प्राथमिक उपचार, टीकाकरण और बधियाकरण का काम सौंपा था। उस समय वादा किया गया था कि ग्राम पंचायत स्तर पर इनकी नियुक्ति कर मानदेय व अन्य सुविधाएं दी जाएंगी। लेकिन आज तक न तो नियुक्ति हुई और न ही सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
गौ सेवकों द्वारा अधिकांश समय पशु विभाग का ही कार्य किया जाता है—प्राथमिक उपचार, टीकाकरण, पशु शिविर से लेकर कृत्रिम गर्भाधान तक—लेकिन इसके बावजूद इन्हें न मानदेय मिलता है, न दवाइयां और न ही बीमा सुविधा। कई गौ सेवक कार्य के दौरान घायल हुए या विकलांग हो गए, लेकिन उनका मुफ्त इलाज तक नहीं हुआ।
शिवसेना ने मांग की है कि गौ सेवकों का मानदेय तय किया जाए, पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं, घायल गौ सेवकों के लिए मुफ्त इलाज और बीमा की सुविधा सुनिश्चित हो, साथ ही सुरक्षा के लिए टॉर्च, जूते और रैनकोट भी प्रदान किए जाएं।
प्रदेशभर में पिछले 50 दिनों से शिवसेना गौ रक्षा हेतु महा हस्ताक्षर अभियान चला रही है और गौ सेवकों का सम्मान भी किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि शासन को अब गौ सेवकों और कृत्रिम गर्भाधान कार्यकताओं की वास्तविक समस्याओं पर संज्ञान लेकर तत्काल समाधान करना चाहिए।
छत्तीसगढ़ विजन टीवी
डोंगरगांव से ओमकार साहू

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