*विश्व डाक दिवस पर बच्चों ने जाना डाकघर का महत्व और डाक टिकटों का इतिहास*
*शिक्षिका ममता साहू ने प्रदर्शित किए 150 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डाक टिकट, बच्चों में बढ़ी जिज्ञासा*
दुर्गूकोंदल/नरहरपुर (कांकेर)। विश्व डाक दिवस के अवसर पर बालक आश्रम चरभट्टी (संकुल केंद्र उम्रदाहा), विकासखंड नरहरपुर में एक विशेष शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिका ममता साहू द्वारा बच्चों को डाकघर की विशेषताओं, महत्व और उसके ऐतिहासिक योगदान से परिचित कराया गया।कार्यक्रम के दौरान शिक्षिका ने बच्चों को बताया कि डाक तंत्र न केवल संचार का माध्यम रहा है, बल्कि यह देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विकास का भी महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। उन्होंने बच्चों को पत्र लिखने की परंपरा, डाक टिकटों के महत्व तथा उनके माध्यम से देश-विदेश की संस्कृति को समझने के बारे में विस्तार से बताया।कार्यक्रम में निबंध और चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने डाक टिकटों का महत्व और “डाकघर का बदलता स्वरूप” विषय पर अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित की।शिक्षिका ममता साहू ने इस अवसर पर अपने द्वारा संग्रहित 150 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय डाक टिकटों का विशेष प्रदर्शनी भी लगाई, जिससे बच्चे बेहद उत्साहित हुए।उन्होंने बताया कि उन्हें बचपन से ही डाक टिकट संग्रहण का शौक है और वर्षों से उन्होंने विभिन्न देशों जैसे भारत, जापान, इंग्लैंड, फ्रांस, अमेरिका, रूस और श्रीलंका के डाक टिकटों को संग्रहित किया है।ममता साहू ने कहा, हर डाक टिकट एक कहानी कहता है यह देश की संस्कृति, इतिहास और विज्ञान की झलक प्रस्तुत करता है। डाक टिकट केवल एक संचार माध्यम नहीं, बल्कि यह कला और इतिहास का जीवंत प्रतीक है।बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक प्रदर्शनी देखी और विभिन्न देशों के टिकटों के बारे में जानकारी ली। कई छात्रों ने कहा कि वे अब स्वयं भी डाक टिकट संग्रहण प्रारंभ करना चाहेंगे।कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मक सोच, ऐतिहासिक समझ और ज्ञान की जिज्ञासा को बढ़ावा देना था।कार्यक्रम के समापन पर शिक्षिका ममता साहू ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों में शिक्षा के प्रति जिज्ञासा और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करते हैं ।

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