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Durgkondal: किसानों ने सीखी आधुनिक कृषि तकनीक और समन्वित खेती के गुर*

 *किसानों ने सीखी आधुनिक कृषि तकनीक और समन्वित खेती के गुर*



दुर्गूकोंदल/नरहरपुर।एक्सटेंशन रिफॉर्म्स आत्मा योजना के अंतर्गत आज कृषि विज्ञान केन्द्र सिंगारभाट, कांकेर में एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न ग्रामों के महिला एवं पुरुष कृषकों ने भाग लिया और आधुनिक खेती से जुड़ी कई तकनीकी जानकारियाँ प्राप्त कीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री दिनेश कुमार कुंजाम (नरहरपुर) द्वारा किया गया। उन्होंने किसानों से संवाद करते हुए बताया कि खेती में देखकर सीखना अत्यंत प्रभावी तरीका है। उन्होंने किसानों को समन्वित खेती प्रणाली अपनाने, तकनीकी विधियों का उपयोग करने तथा खेती को लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।इसके पश्चात डॉ. कोमल सिंह केराम, विषय वस्तु विशेषज्ञ (मृदा विज्ञान), कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर ने किसानों को मिट्टी परीक्षण की विधि, मिट्टी नमूना लेने की प्रक्रिया, मिट्टी परीक्षण उपरांत अनुशंसित मात्रा में उर्वरक प्रयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य सुधारने के लिए दलहन-तिलहन, उद्यानिकी फसल, पशुपालन, मछली पालन और प्राकृतिक खेती को साथ में अपनाना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है।इसके आगे डॉ. चंदू लाल ठाकुर, विषय वस्तु विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केन्द्र कांकेर ने किसानों को केंद्र में संचालित गतिविधियों का भ्रमण कराया।कृषकों ने आधुनिक गौशाला, कड़कनाथ पालन इकाई, मत्स्य सह बत्तख पालन, उद्यानिकी फसलें आम, जामुन, हल्दी, सीताफल, कंदवर्गीय फसलें, नर्सरी, पोषण वाटिका, लघु धान्य फसल प्रसंस्करण इकाई, बीज उत्पादन और बीज प्रक्रिया इकाई का अवलोकन किया।उन्होंने बताया कि ये सभी गतिविधियाँ किसानों की आय को बढ़ाने में सहायक हैं और एकीकृत कृषि मॉडल के माध्यम से वर्षभर स्थायी आय सुनिश्चित की जा सकती है।भ्रमण कार्यक्रम में श्री रोशन कुमार निषाद (ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर, नरहरपुर), श्री विनोद चतुर्वेदी (असिस्टेंट टेक्नोलॉजी मैनेजर), एवं श्री अभिमन्यु बघेल (कृषक मित्र) की उपस्थिति रही।इसके साथ ही ग्राम उर्रैया, बरेठीनबहारा, भनसुली, बतबनी एवं लेंडारा के महिला एवं पुरुष कृषक बड़ी संख्या में शामिल हुए।कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों में तकनीकी दक्षता, आधुनिक कृषि पद्धति एवं वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना था।

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