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Durgkondal: झिटकाटोला में कलवर माइंस के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन 16वें दिन भी जारी*

*झिटकाटोला में कलवर माइंस के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन 16वें दिन भी जारी*


*मूलभूत सुविधाओं और रोजगार की मांग पर अड़े ग्रामीण, प्रबंधन की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश*



दुर्गूकोदल। विकासखंड दुर्गूकोदल अंतर्गत ग्राम पंचायत झिटकाटोला में ग्रामीणों का कलवर माइंस प्रबंधन के खिलाफ धरना प्रदर्शन 16वें दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में संचालित माइंस द्वारा वर्षों से यहां के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तो किया गया, लेकिन गांव के विकास, स्थानीय सुविधाओं के विस्तार एवं युवाओं को रोजगार देने के मामले में कोई ठोस पहल नहीं की गई।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि माइंस संचालन के दौरान मिट्टी, धूल और भारी वाहनों के आवागमन से गांव की सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। वहीं, पीने के पानी की समस्या, रोजगार में स्थानीय लोगों की उपेक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभाव जैसे मुद्दों को कई बार प्रशासन तथा माइंस प्रबंधन के समक्ष रखा गया, किन्तु अब तक समस्या समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन आगे और तेज किया जाएगा।धरना स्थल पर आज ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधिगण भी ग्रामीणों के समर्थन में पहुंचे।पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि श्री धनसिंह ध्रुव, उपसरपंच श्री रमेश सलाम तथा सभी वार्ड पंच आंदोलनकारियों के बीच मौजूद रहे और उन्होंने ग्रामीणों की मांगों को उचित ठहराते हुए कहा कि गांव की समस्याओं का समाधान होना आवश्यक है।जनप्रतिनिधियों ने कहा कि माइंस प्रबंधन को ग्राम हितों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि संसाधनों की प्राप्ति ग्राम के भू-क्षेत्र से हो रही है। ऐसे में गांव की उन्नति और रोजगार का अधिकार ग्रामीणों का वैधानिक और नैतिक दोनों अधिकार है। उन्होंने प्रशासन से भी हस्तक्षेप कर समझौता वार्ता प्रारंभ कराने की अपील की।ग्रामीणों ने मांग रखी है कि स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर स्थायी रोजगार दिया जाए।गांव में पीने के पानी, स्वास्थ्य शिविर एवं धूल प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था होटूटी सड़कों और आंतरिक मार्गों की मरम्मत कराई जाए,,ग्राम विकास के लिए वार्षिक स्थायी फंड निर्धारित किया जाए।प्रबंधन और प्रशासन की चुप्पी से ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है और उनका कहना है कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक धरना जारी रहेगा। 

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