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Durgkondal: कर्रामाड़ में धान फसल बर्बाद, किसानों की मेहनत पर पानी — बीमारी व बेमौसम बारिश बनी कारण*

 *कर्रामाड़ में धान फसल बर्बाद, किसानों की मेहनत पर पानी — बीमारी व बेमौसम बारिश बनी कारण*


*ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से बीमा व मुआवजा दिलाने की उठाई मांग*


दुर्गूकोदल | 4 नवंबर 2025




विकासखंड दुर्गूकोदल अंतर्गत ग्राम कर्रामाड़ में इस वर्ष धान फसल पर बीमारी और बेमौसम बारिश के लगातार प्रभाव से किसानों की मेहनत पानी में बह गई। खेतों में लगी धान की फसल अब कटाई योग्य अवस्था में थी, लेकिन अचानक आई बारिश और फसल में कीट-बीमारी फैलने से फसल का बड़ा भाग नष्ट हो गया है। इससे क्षेत्र के किसानों में भारी निराशा और आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।ग्राम के किसान कनक सोम, छबीला रावटे, सुंदरलाल चुरेंद्र, योगेश चिराम, अश्वनी सोम, कृष्ण सोम, केशो, परदेसी दुग्गा, जेठू सोम, गोदावरी सोम, जैन पिद्दा, पदुम सोम, अनीत मरकाम, चम्मूलाल पोया, सुभाष सोम, संतालाल मरकाम, भीमसेन, मंशा मरकाम, चंदूराम ध्रुव, दिलीप, रोहित मरकाम, फूलसिंह, प्रेमबाई सहित अनेक किसानों ने बताया कि उन्होंने धान लगाने में बीज, खाद, दवाई, मजदूरी, सिंचाई और समय का बड़ा निवेश किया था, परंतु प्रकृति और बीमारी के प्रहार ने सारी लागत डुबो दी।किसानों का कहना है कि इस वर्ष फसल से घर-परिवार सहित आगामी बोनी के लिए भी आय की आशा थी, लेकिन अब स्थिति उलट गई है। कई किसानों के पास अगली फसल के लिए पूंजी जुटाने का भी साधन नहीं बचा है। ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में फसल की क्षति का वास्तविक आकलन करने के लिए राजस्व विभाग और कृषि विभाग द्वारा त्वरित क्षति सर्वे कराया जाना आवश्यक है।किसानों ने मांग की है कि फसल बीमा कंपनी तथा प्रशासन द्वारा जल्द से जल्द सर्वे कर बीमा राशि और मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके और अगली फसल की तैयारी प्रभावित न हो।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो किसान आंदोलन की स्थिति बन सकती है, क्योंकि यह नुकसान केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि ग्राम स्तर पर व्यापक आर्थिक संकट की ओर संकेत है।ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत और लगन का उचित प्रतिफल मिल सके।

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