जुआ कार्रवाई में ‘दोहरा मापदंड’! गरीबों की तस्वीर सार्वजनिक, रसूखदारों पर पर्दा
डोंगरगढ़। डोंगरगढ़ थाना क्षेत्र में जुआरियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। दो दिन पहले थाना पुलिस द्वारा जुआरियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जिसकी बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी मीडिया को दी गई थी। कार्रवाई में पकड़े गए लोगों के फोटो भी सामने आए थे।लेकिन इसके ठीक दो दिन बाद थाना क्षेत्र में चार लोगों के कथित रूप से जुआ खेलते पकड़े जाने की सूचना सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, चारों लोगों को पुलिस थाने लेकर पहुंची और उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी की गई। इसके बावजूद इस कार्रवाई को लेकर पहले जैसी कोई स्पष्ट प्रेस विज्ञप्ति अथवा फोटो सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं।
एक ही तरह की कार्रवाई, फिर सूचना देने में अंतर क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पहले जुआ कार्रवाई की जानकारी बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सार्वजनिक की गई थी, तो दूसरी कार्रवाई की जानकारी उसी तरह सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? यदि चारों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की गई है, तो पुलिस को इसकी जानकारी मीडिया और आम जनता के सामने रखने में क्या आपत्ति है?
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि इस बार पकड़े गए लोगों के फोटो सार्वजनिक नहीं किए जाने की बात कही गई। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस की ओर से होना बाकी है। ऐसे में पुलिस प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि फोटो जारी करने अथवा नहीं करने के लिए क्या कोई निर्धारित नियम या विभागीय प्रक्रिया है।
क्या प्रभावशाली और सामान्य लोगों के लिए अलग-अलग मापदंड?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। लोगों के बीच यह चर्चा होने लगी है कि क्या पुलिस कार्रवाई में सभी आरोपियों के लिए एक समान मापदंड अपनाए जा रहे हैं?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले की कार्रवाई में आरोपियों के फोटो सहित जानकारी सार्वजनिक की गई, जबकि इस मामले में फोटो और कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई। हालांकि किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव या दबाव में कार्रवाई नहीं होने का दावा फिलहाल प्रमाणित नहीं है, लेकिन पुलिस की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं आने के कारण ऐसी चर्चाओं को बल मिल रहा है।
पुलिस से जवाब की अपेक्षा
पुलिस प्रशासन को इस मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि चारों लोगों को किस आधार पर पकड़ा गया, उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, क्या प्रकरण दर्ज किया गया और यदि कार्रवाई हुई है तो उसकी जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि क्या पुलिस द्वारा आरोपियों के फोटो जारी करने को लेकर कोई निर्धारित विभागीय नीति है और क्या वह नीति सभी मामलों में समान रूप से लागू होती है।
पारदर्शिता पर टिकी पुलिस की विश्वसनीयता
जुआ और अन्य अवैध गतिविधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन कार्रवाई के साथ-साथ उसमें पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आम जनता यह जानना चाहती है कि कानून सभी के लिए समान है और पुलिस की कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव नहीं होता।
डोंगरगढ़ थाना पुलिस द्वारा हालिया कार्रवाई को लेकर उठे सवालों का जवाब अब पुलिस प्रशासन के आधिकारिक स्पष्टीकरण से ही मिल सकेगा।
अब देखना यह है कि चार जुआरियों की इस कार्रवाई पर पुलिस क्या जानकारी सार्वजनिक करती है और क्या इस मामले में भी पहले की तरह प्रेस विज्ञप्ति एवं कार्रवाई का विवरण सामने आता है।

0 Comments