बकरकट्टा PHC में आदिवासियों के स्वास्थ्य से बड़ा खिलवाड़; प्रभारी कक्ष में सोते रहे डॉक्टर, आठवीं पास सफाईकर्मी के भरोसे रही मरीजों की जिंदगी!
संवाददाता - मंदीप सिंह
स्थान - खैरागढ़
खैरागढ़। बस्तर से लेकर सरगुजा और खैरागढ़ के वनांचलों तक, सरकारें आदिवासियों के कल्याण, विशेष स्वास्थ्य योजनाओं और करोड़ों रुपये के बजट का ढिंढोरा पीटने से नहीं थकतीं। लेकिन जिला मुख्यालय से कोसों दूर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (KCG) जिले के अंतिम छोर पर बसे बकरकट्टा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से सामने आई तस्वीरें इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। वनांचल के आदिवासियों को मिलने वाली 'मुफ्त और बेहतर चिकित्सा' का जमीनी सच यह बताया जा रहा है कि यहाँ कथित तौर पर अस्पताल में इलाज डॉक्टर नहीं, बल्कि एक आठवीं पास सफाई कर्मचारी कर रहा है। यदि ये आरोप सच हैं, तो यह सीधे तौर पर एक पिछड़े और संवेदनशील अंचल के नागरिकों के मानवाधिकारों और उनकी जिंदगी के साथ बड़ा खिलवाड़ है।
आरामगाह बना प्रभारी का कक्ष, सफाईकर्मी के भरोसे ओपीडी?
बकरकट्टा का यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र इस बात का जीवंत उदाहरण बनता जा रहा है कि जब प्रशासनिक मॉनिटरिंग लचर होती है, तो सरकारी संस्थान किस कदर अव्यवस्था की भेंट चढ़ जाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के मुताबिक, जब ग्रामीण दूर-दराज के गांवों से पैदल या कटी-फटी सड़कों से होकर अस्पताल पहुंचते हैं, तो उन्हें अस्पताल में तैनात डॉक्टर साहब की जगह कथित रूप से झाड़ू लगाने वाला सफाई कर्मचारी इलाज करते हुए मिलता है, जिसके जिम्मे असल में अस्पताल की साफ-सफाई की जिम्मेदारी है।
आरोप है कि यह आठवीं पास चतुर्थ वर्ग कर्मचारी न सिर्फ ओपीडी की पर्चियां फाड़ रहा है, बल्कि बीमारियों की दवाइयाँ तय करने, बीपी-शुगर नापने और मरीजों को इंजेक्शन लगाने जैसे संवेदनशील काम भी बेखौफ होकर कर रहा है। चर्चा है कि यह पूरा घटनाक्रम केंद्र प्रभारी डॉ. हिरवानी की मौजूदगी में हो रहा है। बताया जा रहा है कि प्रभारी डॉक्टर साहब अस्पताल में उपस्थित होने के बावजूद अपने आराम कक्ष में विश्राम फरमा रहे थे। यदि इन दावों में सच्चाई है, तो यह सुदूर अंचल के इन गरीब आदिवासियों की सेहत के प्रति घोर संवेदनहीनता को दर्शाता है।
भीतर का सच: 'मौखिक' पर्चियों पर गायब रहता है स्टाफ, साठगांठ की आशंका
अस्पताल की अव्यवस्था केवल एक सफाईकर्मी द्वारा कथित तौर पर इलाज किए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा प्रशासनिक ढांचा ही सवालों के घेरे में है। पड़ताल में सामने आया है कि अस्पताल का आधा स्टाफ ड्यूटी से नदारद रहता है। जब इस अव्यवस्था को लेकर संस्था के फार्मासिस्ट कोर्राम से संपर्क किया गया, तो उनका जवाब हैरान करने वाला था। फार्मासिस्ट ने कहा, "हमने हिरवानी सर से मौखिक रूप से छुट्टी मांग ली है।"
शासकीय नियमों को ताक पर रखकर इस तरह 'मौखिक तौर पर' ड्यूटी से गायब रहने की प्रवृत्ति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। एक तरफ योग्य नर्सिंग और फार्मेसी के युवा नौकरियों के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी वेतन उठाने वाले जिम्मेदारों को इस तरह की कथित ढिलाई के लिए संरक्षण मिलना आपसी साठगांठ की ओर इशारा करता है।
बड़ा सवाल: क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है प्रशासन?
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, गलत दवा या अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा लगाया गया एक गलत इंजेक्शन किसी भी इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। बकरकट्टा के भोले-भाले ग्रामीण, जो अस्पताल को राहत का केंद्र मानते हैं, वे अनजाने में अपनी सेहत एक अप्रशिक्षित स्टाफ के भरोसे छोड़ रहे हैं।
यहाँ एक बड़ा नीतिगत सवाल उठता है— क्या खैरागढ़ का जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? क्या सुदूर अंचल में तैनात डॉक्टरों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के लिए जिला मुख्यालय में बैठे आला अधिकारियों के पास वक्त नहीं है?
इस संवेदनशील मामले में केवल विभागीय जांच या कारण बताओ नोटिस जारी करना नाकामी को छिपाने जैसा होगा। क्षेत्र की जनता अब यह देखना चाहती है कि क्या इस गंभीर लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों और नियमों को ठेंगा दिखाने वाले स्टाफ पर प्रशासन सख्त और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई करता है या नहीं।
मामले में केंद्र प्रभारी डॉ. हिरवानी का पक्ष
इस पूरे मामले और अस्पताल में फैली अव्यवस्था को लेकर जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बकरकट्टा के प्रभारी डॉ. हिरवानी से सवाल किए गए, तो उन्होंने अपनी सफाई पेश की। डॉ. हिरवानी का कहना है कि अस्पताल में लंबे समय से स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है, जिसके कारण व्यवस्था बनाने में दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि, डॉक्टर साहब की यह दलील इस सवाल का जवाब नहीं दे सकी कि स्टाफ की कमी होने पर क्या एक अप्रशिक्षित सफाई कर्मचारी को मरीजों की जान जोखिम में डालकर इलाज करने की खुली छूट दी जा सकती है?
अधिकारियों का पक्ष
चिकित्सा अधिकारी (BMO) बघेल से इस मामले में जानकारी ली गई तो उनका कहना है कि "मामला संज्ञान में आया है, जांच कर कार्रवाई की जाएगी।"

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