Cgvtv संवाददाता राम प्रताप सिंह की रिपोर्ट बेलगहना...
कोटा, 13 जून। ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण एवं पोषण सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जन स्वास्थ्य सहयोग संस्था द्वारा संचालित गरिमा (ग्रामीण आत्मनिर्भर रोजगारी मंच) ने ग्राम सराईपाली (कोटा) में “आत्मनिर्भर पोषण” परियोजना के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों के लिए दाल प्रसंस्करण इकाई (दाल मिल) की स्थापना की। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना, दलहन आधारित पोषण को बढ़ावा देना तथा कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन सुनिश्चित करना है।
दाल प्रसंस्करण इकाई का लोकार्पण मा. पी. डी. हाथेश्वर, उप संचालक कृषि, जिला बिलासपुर के करकमलों द्वारा किया गया। इस अवसर पर स्थानीय स्तर पर प्रसंस्कृत दाल के एक किलोग्राम पैक का भी औपचारिक शुभारंभ किया गया।
जन स्वास्थ्य सहयोग संस्था द्वारा संचालित गरिमा मंच विगत कई वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण, स्वास्थ्य, जैविक कृषि, मिलेट्स एवं दलहन उत्पादन, प्रसंस्करण तथा विपणन के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। संस्था का लक्ष्य स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका के अवसर विकसित करना तथा ग्रामीण समुदायों, विशेषकर महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
संस्था ने क्षेत्र में पोषण विविधता की कमी को देखते हुए किसानों को दलहन उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया। प्रारंभिक प्रयासों में किसानों ने आवारा पशुओं से होने वाले नुकसान के कारण दलहन उत्पादन में रुचि नहीं दिखाई। इस समस्या के समाधान हेतु संस्था ने समुदाय के साथ मिलकर सामूहिक बाड़बंदी (फेंसिंग) की पहल की। वर्तमान में मानपुर, करका, करपीहा एवं सराईपाली सहित कई गांवों में सामूहिक फेंसिंग स्थापित की गई है, जिसके परिणामस्वरूप दलहन उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि किसान अपनी उपज को कम मूल्य पर बेच देते थे तथा दलहन का उपयोग घरेलू भोजन में अपेक्षाकृत कम होता था। इसी परिप्रेक्ष्य में महिला स्व-सहायता समूहों के साथ समन्वय स्थापित कर दाल प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने का निर्णय लिया गया, ताकि स्थानीय स्तर पर ही दाल का प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन हो सके तथा किसानों एवं महिलाओं को बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो।
इस अवसर पर उपस्थित मुख्य अतिथि मा. पी. डी. हाथेश्वर ने कहा कि स्थानीय स्तर पर स्थापित ऐसी प्रसंस्करण इकाइयाँ किसानों और महिला समूहों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करेंगी। उन्होंने इस पहल को ग्रामीण विकास एवं महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल बताया।
कार्यक्रम में आसपास के गांवों से लगभग 300 महिला-पुरुष प्रतिभागियों, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों तथा विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सहभागिता की।
गरिमा मंच की यह पहल ग्रामीण समुदायों को आर्थिक आत्मनिर्भरता, पोषण सुरक्षा और स्थानीय रोजगार सृजन की दिशा में एक नया मार्ग प्रदान करेगी तथा महिला नेतृत्व आधारित ग्रामीण उद्यमिता को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




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