खामहारडीही जंगल में हजारों पेड़ों की बेरहमी से कटाई मामला: वन विभाग की बड़ी गाज; डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड निलंबित, राजस्व रिकॉर्ड और बैंक लोन की जांच शुरू
संवाददाता - मंदीप सिंह
स्थान - खैरागढ़
खैरागढ़। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (KCG) जिले के छुईखदान विकासखंड अंतर्गत ग्राम भूजारी के खामहारडीही जंगल में हुए कथित अवैध पेड़ कटाई मामले में वन विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वनमंडलाधिकारी (DFO) पंकज राजपूत ने बड़ी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र के डिप्टी रेंजर डोमन सिंह पदनाकर और बीट गार्ड ताराचंद यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से पूरे महकमे और इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।
दरअसल, पिछले दिनों खामहारडीही जंगल के भीतर बड़े पैमाने पर जेसीबी मशीन और लख्खा आरा के जरिए हजारों हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काटने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए जब इस विनाश का खुलासा हुआ, तब जाकर वन विभाग और राजस्व विभाग की नींद खुली। इसके बाद दोनों विभागों की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में जो बातें सामने आ रही हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं। कथित तौर पर संबंधित भूमि कुछ रसूखदारों के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। वहीं दूसरी ओर, वन विभाग के दावों और जांच के मुताबिक इस जमीन का अधिकांश वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर यह वन भूमि है, तो यह निजी नाम पर कैसे दर्ज हुई और आखिर किस नियम या रसूख के आधार पर इस सरकारी भूमि को निजी बताकर राजस्व रिकॉर्ड में चढ़ा दिया गया।
यह मामला सिर्फ अवैध कटाई और जमीन के हेरफेर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़े वित्तीय घालमेल की आशंका भी गहरा गई है। सूत्रों से मिली बेहद गंभीर जानकारी के अनुसार, इसी विवादित भूमि के दस्तावेजों के आधार पर बैंक से मोटा लोन भी लिया गया है। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है, तो यह मामला राजस्व धोखाधड़ी और बैंकिंग घोटाले का एक बड़ा रूप ले सकता है। स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों का साफ कहना है कि जंगल के भीतर घुसकर हजारों पेड़ों को गायब कर देना बिना किसी बड़ी मिलीभगत के मुमकिन नहीं है। यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि प्राकृतिक संपदा को ठिकाने लगाने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा लगता है।
इस पूरे मामले पर खैरागढ़ वनमंडल के डीएफओ पंकज राजपूत का कहना है कि मामले की प्रारंभिक गंभीरता और लापरवाही को देखते हुए डिप्टी रेंजर और बीट गार्ड को सस्पेंड कर दिया गया है। वर्तमान में जमीन के सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड्स की संयुक्त जांच की जा रही है। इस मामले में जो भी अन्य लोग या अधिकारी संलिप्त पाए जाएंगे, उन पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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