कंधे पर नागर रख सड़क पर बैठे अन्नदाता, केसीजी के पैलीमेटा में खाद की किल्लत पर किसानों का अनोखा प्रदर्शन, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
संवाददाता-मंदीप सिंह
स्थान-खैरागढ़
खैरागढ़।केसीजी (खैरागढ़-छुईखदान-गंडई) जिले के पैलीमेटा क्षेत्र में खाद की किल्लत से परेशान किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। मानसून की दस्तक के साथ जहां इस वक्त किसानों को खेतों में होना चाहिए था, वहीं व्यवस्था से लाचार अन्नदाता सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। अपनी मांगों को लेकर पैलीमेटा क्षेत्र के सैकड़ों किसानों ने अपने कंधों पर नागर यानी हल रखकर एक अनोखा प्रदर्शन किया और मुख्य मार्ग पर ही घंटों धरने पर बैठे रहे। भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बावजूद किसानों का हौसला कम नहीं हुआ और उन्होंने शासन-प्रशासन के लचर रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि खेती-किसानी का सीजन सिर पर है और खेतों को तैयार करने के बाद अब खाद की सख्त जरूरत है, लेकिन सहकारी समितियों में खाद उपलब्ध नहीं है। समय पर खाद नहीं मिलने के कारण बोहनी का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है, जिससे आगामी फसल के उत्पादन पर भी संकट मंडराने लगा है। किसानों ने आरोप लगाया कि हर बार ऐन वक्त पर खाद की कृत्रिम किल्लत हो जाती है और प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा गरीब किसानों को भुगतना पड़ता है। किसान खाद के लिए सोसायटियों के चक्कर काट-काट कर थक चुके हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है।
किसानों का यह आक्रोश सिर्फ खाद की किल्लत तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने प्रशासन के सामने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक समस्याओं को जल्द दूर करने की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही पिछले दिनों धान खरीदी केंद्रों में हुई बड़े पैमाने पर 'साटेज' (अनाज की कमी) के मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग प्रमुखता से की गई है, ताकि इस गड़बड़ी के पीछे जिम्मेदार दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।
पैलीमेटा क्षेत्र के किसान नेताओं ने शासन और जिला प्रशासन को साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यह प्रदर्शन सिर्फ एक सांकेतिक चेतावनी था। अगर प्रशासन ने अगले कुछ दिनों के भीतर सोसायटियों में पर्याप्त खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की और केसीसी समेत अन्य समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में उग्र चक्काजाम और जिला स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। फिलहाल, किसानों के इस तीखे तेवर के बाद अब हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि जिम्मेदार अधिकारी इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाते हैं।


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