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Gariyaband: झाखरपारा खरीदी केंद्र फिर सुर्खियों में 32 लाख से अधिक का गबन प्रबंधक गया जेल*

 *झाखरपारा खरीदी केंद्र फिर सुर्खियों में 32 लाख से अधिक का गबन प्रबंधक गया जेल*


*1063 क्विंटल धान गायब प्राधिकृत अधिकारी के शिकायत पर हुयी कारवाई 



गरियाबंद --देवभोग ब्लाक के झाखरपारा फिर एक बार धान खरीदी में हुये गड़बड़ी को लेकर सुर्खियों में है।धान खरीदी केंद्र झाखरपारा से लगभग 32.95 लाख का 1063.20 क्विंटल धान समिति से गायब हो गये है।इस आरोप में समिति के प्रभारी प्रबंधक चंदन सिंह राजपूत को देव भोग पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।ये दूसरी दफा है जब समिति के ऊपर धान खरीदी में हेराफेरी और गबन के मामले में जेल की हवा खानी पड़ी है।देवभोग थाना प्रभारी फैजूल होदा शाह ने बताया वर्ष 2024-25 के धान खरीदी सीजन में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति झाखरपारा के प्रभारी प्रबंधक चंदन सिंह राजपूत ने 1063.20 क्विंटल धान जो 32 लाख 95920 रूपये लागत का है गबन कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाया है।


*शिकायत हुयी सहकारिता विभाग को सूचना के बाद मामला दर्ज जांच में अनियमितता की पुष्टि*


मामले पर शासन की ओर से नियुक्त प्राधिकृत अधिकारी डॉ पदुलोचन जगत ने बीते 09 सितम्बर को समिति प्रबंधक के खिलाफ शिकायत की शिकायत के बाद  मामले पर जांच हुयी अमानत खयानत और धोखाधड़ी की पुष्टि के बाद देवभोग पुलिस ने प्रभारी प्रबंधक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया थाना प्रभारी ने कहा मामला संगीन है इसलिये जांच चल रही है आगे जांच में जो भी दोषी होंगे उन्हें सही आरोपी बनाया जायेगा।


*2015 में तत्कालीन समिति ने किया था 60 लाख का गबन 6 लोग गये थे जेल*


वर्ष 2015 में भी ऐसा ही एक मामला इसी समिति में घटित हुआ था जिसमें 3 हजार क्विंटल धान जिसकी लागत 60 लाख रूपये की कमी देखी गयी थी बाद में जब जांच हुयी तो प्रबंधक, आपरेटर से लेकर समिति  पदाधिकारी भी इसमें दोषी पाये गये थे और उन्हें जेल जाना पड़ा था लम्बे समय के बाद जमानत पर रिहा तो हुये पर मामला अभी तक लंबित है अब दूसरी बार भी इसी तरीके से शासन को चुना लगाया गया है इसमें बड़े जिम्मेदार अभी पकड़ से बहार है ऐसे सूत्रों की मानें तो इसमें आरोपीयों की लम्बी लिस्ट हो सकती है।


*हर बार अमानत ख़यानत का खेल आखिर क्यों समिति प्रबंधक ही बनता है बली का बकरा?*


समिति में शासन को चुना लगाने का खेल झाखरपारा समिति का पुराना परंपरा है खेल में बड़े बड़े लोग शामिल पर हर बार इस खेल में अनुभव हीन प्रभारी प्रबंधक ही सूली पर चढ़ता है।इसके पिछे दैनिक वेतनभोगी को करोड़ों रूपये के खरीदी की जिम्मेदारी दिये जाने का रिवाज ही सबसे बड़ी खामी है। सहकारिता विभाग मांग पर आसानी से खरीदी केन्द्र तो संचालित करती है पर बड़ी जिम्मेदारी को अनुभवहीन और दैनिक वेतनभोगी के हाथों सौप देती है तमाम काले पीले कारनामों में हस्ताक्षर भी प्रभारी के होते हैं आखरी में प्रभारी प्रबंधक ही बलि का बकरा बनता है।


 *सवालों के घेरे में मानिटरिंग के अधिकारी आखिर इतने बड़े गबन में सिर्फ प्रभारी ही क्यों दोषी*?


खरीदी को साफ सुथरी अनियमितता रहित करने शासन हर तरह के जतन करती है ब्लाक के कर्मचारियों  से लेकर अधिकारीयों की ड्युटी लगायी जाती है पर इनके नजरों में अनियमितता क्यों नहीं दिखती? वहीं इस बार भी शिकायत के मुताबिक माह मई के आनलाइन रिपोर्ट में 2708.56क्विंटल की कमी देखी गयी माह भर बाद जून में जब दुबारा भौतिक सत्यापन हुआ तो 1363 क्विंटल उपार्जन के अंतर पाये गये थे तत्पश्चात प्रभारी प्रबंधक चंदन सिंह राजपूत ने 300 क्विंटल की भरपाई तो कर दिया पर शेष 1063 क्विंटल की भरपाई अभी तक नहीं हो सकी।मानिटरिंग अधिकारीयों की नजर उस समय इस क्यों नहीं पड़ी और  उसकी भरपाई अभी तक क्यों नहीं हो सकी? नहीं लोग कयास लगा रहे हैं कहीं प्रभारी प्रबंधक ने अपने हिस्से की भरपाई कर दी और शेष बची भरपाई विवादों में तो नहीं पहले प्रकरण की तरह बाद में इसका खुलासा हो सकता है और सह आरोपियों की लम्बी लिस्ट बन सकती है।

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